पाठ - 1
कबीर दास के दोहे
गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागौं पाँय। बलिहारी गुरु आपने, गोविंद दियो बताय ।।
साधू ऐसा चाहिए, जैसा सूप सुभाय। सार सार को गहि रहै, थोथा देइ उड़ाय ।।
ऐसी बानी बोलिए मन की आपा खोय। औरन को सीतल करै, आपहुँ सीतल होय ।।
बड़ा हुआ तो क्या हुआ, जैसे पेड़ खजूर । पंथी को छाया नहीं, फल लागै अति दूर ।।
निंदक नियरे राखिए, आँगन कुटी छवाय। बिन पानी साबुन बिना, निर्मल करे सुभाय ।।
— संत कबीर दास
[चित्र विवरण: संत कबीर दास जी का चित्र, जिसमें वे लाल रंग की टोपी और गेरुए वस्त्र पहने हुए हैं तथा उनकी श्वेत दाढ़ी है।]
कवि परिचय :
कबीर दास - संत कबीर दास जी का जन्म सन् 1398 ई. में हुआ था। वे एक ऐसे संत थे, जो करघे पर कपड़ा और मन में कविता बुनते-बुनते इतने प्रसिद्ध हो गए कि उनकी रचनाएँ आज भी लोग सुनते हैं और पढ़ते हैं। उनकी रचनाएँ मुख्यतः 'कबीर ग्रंथावली' में संगृहीत हैं। कबीर के दोहे बहुत ही प्रसिद्ध हैं, जो कि लोगों के दैनंदिन जीवन में काम आते हैं। इन दोहों को 'साखी' भी कहा जाता है, ये दोहे उनके ज्ञान और अनुभव के साक्षी हैं। कबीर की रचनाएँ हमें जीवन की सच्चाई को समझने और अच्छा मनुष्य बनने की प्रेरणा देती हैं।
शब्दार्थ :
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गोविंद - भगवान
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काके - किसके
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बलिहारी - न्योछावर
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सुभाय - स्वभाव
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थोथा - सारहीन
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औरन - दूसरे, अन्य लोग
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पंथी - पथिक
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नियरे - निकट, पास
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दोऊ - दोनों
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पाँय - पाँव, पैर
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सूप - अनाज फटकने का साधन
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गहि रहै - ग्रहण कर लेता है
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आपा - अहंकार, गर्व
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सीतल - शीतल, ठंड
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निंदक - निंदा करने वाला, दूसरों का दोष ढूँढ़ने वाला
बातचीत के लिए :
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गुरु भगवान से बड़े हैं। यह विषय कबीर के कौन से दोहे में वर्णित है ? इसके बारे में आप कक्षा में चर्चा कीजिए।
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साधु के स्वभाव के बारे में आप क्या जानते हैं ? इस पर कक्षा में चर्चा कीजिए।
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मीठी वाणी या मीठे वचन बोलने से हमें क्या लाभ मिलता है ? इसके बारे में कक्षा में बताइए।
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हम बड़े लोग किन्हें कहेंगे ? बड़े लोगों का लक्षण क्या है? इस पर चर्चा कीजिए।
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निंदा करनेवाले लोग परोक्ष में हमारा क्या उपकार करते हैं, सहपाठियों के साथ चर्चा कीजिए।
[चित्र विवरण: सूरज, मुस्कुराते हुए बादलों से होती बारिश और उड़ते हुए दो हरे तोते।]
सोचिए और लिखिए :
- निम्नलिखित प्रश्नों के सही उत्तर विकल्पों में से चुनकर लिखिए।
(क) 'गुरु गोविंद दोऊ खड़े काके लागौं पाँय' इस दोहे में किसके बारे में कहा गया है ? (i) श्रम के महत्व (ii) ज्ञान के महत्व (iii) गुरु के महत्व (iv) भक्ति के महत्व
(ख) 'साधु ऐसा चाहिए जैसा सूप सुभाय। सार सार को गहि रहै थोथा देइ उड़ाय'। इस दोहे में साधु के स्वभाव के बारे में क्या कहा गया है ? (i) साधु का स्वभाव सूप जैसा है। (ii) साधु का स्वभाव नम्र होता है। (iii) साधु स्वभाव से धीर होते हैं। (iv) साधु स्वभाव से अहंकारी होते हैं।
(ग) 'ऐसी बानी बोलिए मन का आपा खोय। औरन को सीतल करै आपहुँ सीतल होय।' इस दोहे के अनुसार मधुर वचन बोलने से क्या लाभ मिलता है ? (i) लोग हमारी प्रशंसा करने लगते हैं। (ii) किसी के साथ विवाद होने पर उसमें जीत मिलती है। (iii) सुनने वालों का मन इधर-उधर भटकने लगता है। (iv) स्वयं को और दूसरों को मानसिक शांति मिलती है।
(घ) निम्नलिखित में से किस पेड़ के नीचे पथिक को छाया नहीं मिलती ? (i) आम के (ii) मौलश्री के (iii) बरगद के (iv) खजूर के
[चित्र विवरण: तीन संन्यासी/साधु रास्ते पर एक साथ चलते हुए दिख रहे हैं।]
(ङ) 'निंदक नियरे राखिए आँगन कुटी छवाय' इस पंक्ति के अनुसार हमें किस दृष्टिकोण को अपनाना चाहिए ? (i) निंदा करने वालों से बचना चाहिए। (ii) निंदकों को दूर रखना चाहिए। (iii) निंदा करने वालों को पास रखना चाहिए। (iv) निंदको की निंदा करनी चाहिए।
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निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक-एक वाक्य में दीजिए : (क) गुरु और गोविंद दोनों हमारे सामने खड़े हैं तो हमें किनके चरण पहले छूने चाहिए ? (ख) साधु का स्वभाव कैसा होना चाहिए ? (ग) मनुष्यों को कैसी वाणी बोलनी चाहिए ? (घ) दोहे में खजूर के पेड़ के बारे में क्या कहा गया है ? (ङ) कौन पानी और साबुन के बिना हमारे मन को निर्मल कर देता है ?
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निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दो-तीन वाक्यों में दीजिए : (क) साधु के स्वभाव की तुलना किसके साथ की गई है और क्यों ? (ख) मधुर वाणी बोलने से क्या फायदा मिलता है ? (ग) निंदक की बात क्यों सुननी चाहिए ? (घ) कवि के अनुसार गुरु गोविंद से भी श्रेष्ठ कैसे होते हैं ?
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'क' स्तंभ के साथ 'ख' स्तंभ का मिलान कीजिए :
| 'क' | 'ख' |
|---|---|
| गुरु गोविंद दोऊ खड़े | थोथा देइ उड़ाय |
| बलिहारी गुरु आपने | फल लागै अति दूर |
| सार सार को गहि रहै | काके लागू पाँय |
| औरन को सीतल करै | आँगन कुटी छवाय |
| पंथी को छाया नहीं | गोविंद दियो बताय |
| निंदक नियरे राखिए | आपहुँ सीतल होय |
[चित्र विवरण: पेड़ की डाली पर बैठी गाती हुई एक चिड़िया।]
[चित्र विवरण: एक महिला हाथ में पुस्तक लिए दो बच्चों को पढ़ाते और समझाते हुए।]
अनुमान और कल्पना :
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आप के जीवन में गुरु का महत्व क्या है ? बताइए।
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अनुमान लगाइए कि यदि संसार में कोई गुरु या शिक्षक नहीं होता तो क्या होता ?
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सूप का काम क्या होता है? हम सूप के स्वभाव से क्या सीख सकते हैं?
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कल्पना कीजिए कि यदि सभी मनुष्य अपनी वाणी को मधुर बना लेंगे तो समाज में क्या परिवर्तन आ जाएगा ?
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खजूर, ताड़ और नारियल जैसे पेड़ों के नीचे छाया नहीं होती पर ये पेड़ बहुत ही उपयोगी होते हैं। इन पेड़ों की उपयोगिता बताइए।
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यदि समाज में कोई किसी की आलोचना न करें तो क्या होगा ? लाभ या हानि ? अपने विचार कक्षा में साझा कीजिए।
भाषा-ज्ञान :
- निम्नलिखित शब्दों का खड़ीबोली हिंदी रूप लिखिए :
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दोऊ -
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काके -
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सुभाय -
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सीतल -
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बानी -
- निम्नलिखित शब्दों के पर्यायवाची शब्द लिखिए :
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गुरु -
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गोविंद -
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साधु -
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पेड़ -
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पंथी -
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कुटी -
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पानी -
- निम्नलिखित शब्दों के विलोम शब्द लिखिए :
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साधु -
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सार -
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बड़ा -
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गुरु -
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निर्मल -
- कबीर दास जी के दोहों से तुकांत शब्द छाँटिए : जैसे : पाँय – बताय ऐसे ही अन्य तुकांत शब्द छाँटकर लिखिए।
पाठ से आगे
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कबीर दास हिंदी साहित्य के बहुत बड़े कवि हैं। वे भक्ति युग के कवि थे। वैसे ही भक्तियुग में बहुत सारे कवि हुए हैं। जैसे - सूरदास, तुलसी दास, रहीम, मीराबाई, रैदास, नंददास, रसखान आदि। इनमें से कुछ कवियों के द्वारा रचित दोहों और पदों का संग्रह कर कॉपी में लिखिए और उनके अर्थ जानने की कोशिश कीजिए।
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आपकी पुस्तक में कबीर दास जी के पाँच दोहे दिए गए हैं। इनके अलावा कबीर दास जी के द्वारा रचित और कुछ दोहे संग्रह कीजिए तथा उनके अर्थ समझिए।
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कबीर दास जी के विभिन्न दोहों को याद करके कक्षा में सुनाइए।
"दोहा" एक मात्रिक छंद है। इसमें तेरह और ग्यारह क्रम से चौबीस मात्राएँ होती हैं। पाठ में आए दोहों की मात्राओं का हिसाब करें। इसमें शिक्षक की सहायता ली जा सकती है।